रमजान में हमला: क्या ये सिर्फ सैन्य कार्रवाई थी या संदेश?

आशीष शर्मा (ऋषि भारद्वाज)
आशीष शर्मा (ऋषि भारद्वाज)

Middle East की राजनीति में टाइमिंग कभी भी “सिर्फ टाइमिंग” नहीं होती। जब भी United States और Israel जैसे खिलाड़ी मैदान में उतरते हैं, तो कैलेंडर भी रणनीति का हिस्सा बन जाता है।

अगर Iran पर ऑपरेशन रमजान के दौरान होता है, तो सवाल उठना लाज़मी है क्या ये सिर्फ सैन्य ज़रूरत थी या मनोवैज्ञानिक संदेश?

बातचीत चल रही थी… फिर बम क्यों?

दिलचस्प बात ये है कि वॉशिंगटन और तेहरान के बीच बैक-चैनल बातचीत जारी थी। इस संवाद को खास तौर पर Oman सपोर्ट कर रहा था जो लंबे समय से Middle East में ‘शांत दूत’ की भूमिका निभाता आया है।

अब यहां असली सवाल है अगर बातचीत हो रही थी, तो ऑपरेशन की टाइमिंग क्यों?

साफ बात, ऐसे ऑपरेशन महीनों की प्लानिंग से होते हैं। सैटेलाइट इंटेलिजेंस, एयर रूट मैपिंग, लॉजिस्टिक कोऑर्डिनेशन ये सब रातोंरात नहीं बनता। मतलब फैसला अचानक नहीं था।

तो क्या बातचीत सिर्फ “डिप्लोमैटिक पर्दा” थी और असली स्क्रिप्ट पहले से लिखी जा चुकी थी?

रमजान ही क्यों चुना गया?

अब आते हैं सबसे संवेदनशील हिस्से पर।

मनोवैज्ञानिक दबाव

रमजान मुस्लिम दुनिया में आध्यात्मिक और सामाजिक रूप से सबसे अहम महीना है। ऐसे समय हमला करने का मतलब राजनीतिक और धार्मिक भावनाओं को झकझोरना। इससे ईरान पर आंतरिक दबाव बढ़ सकता है।

ऑपरेशनल कैलेंडर

कई बार सैन्य ऑपरेशन मौसम, चांदनी, और रडार कंडीशन जैसे फैक्टर्स देखकर प्लान होते हैं। Middle East की गर्मी और क्लाइमेट विंडो भी अहम भूमिका निभाते हैं।

रीजनल मैसेजिंग

खाड़ी देशों खासकर सऊदी, UAE और कतर को यह संकेत देना कि “सुरक्षा आर्किटेक्चर” अभी भी Washington-Tel Aviv अक्ष के नियंत्रण में है।

साफ शब्दों में कहें तो ये हमला सिर्फ ईरान के लिए नहीं, पूरे Gulf के लिए संदेश था।

क्या ये Middle East के लिए अस्थिर पल है?

हाँ, और वो भी गंभीर रूप से। Oil prices में हलचल, Hormuz Strait पर खतरे की आशंका। Proxies के जरिए जवाबी कार्रवाई का रिस्क।

Middle East में एक मिसाइल का मतलब सिर्फ एक धमाका नहीं बल्कि कई राजधानियों में राजनीतिक भूकंप है।

असली गेम: Negotiation की नई शुरुआत?

इतिहास बताता है कि कभी-कभी बमबारी, बातचीत की टेबल को रीसेट करने का तरीका भी होती है। “Shock and Signal” रणनीति पहले झटका, फिर शर्तों पर नई बातचीत। हो सकता है ये ऑपरेशन ईरान को यह संदेश देने के लिए हो कि “डील करनी है तो नई शर्तों पर।”

राजनीति में ये नया नहीं है। फर्क बस इतना है कि यहां दांव पर पूरा क्षेत्र है।

क्या ये धार्मिक टाइमिंग की सियासत है?

कैलेंडर देखकर हमला करना अगर यह सच है तो यह केवल सैन्य रणनीति नहीं, प्रतीकात्मक राजनीति है। और सच यही है Middle East में प्रतीक, हथियार से ज्यादा ताकतवर होते हैं।

कूटनीति कभी-कभी रोज़े में भी रॉकेट लॉन्च कर देती है। फर्क बस इतना है कि बयान हमेशा “self-defense” के नाम पर आता है।

स्थिरता या स्टेज मैनेजमेंट?

रमजान में Iran पर US-Israel ऑपरेशन को यूँ ही “सैन्य घटना” मान लेना भोलेपन जैसा होगा।

ये एक layered move हो सकता है ईरान पर दबाव। Gulf को संदेश। Negotiation टेबल रीसेट। घरेलू राजनीति को मजबूत करना। Middle East में हर विस्फोट सिर्फ बारूद का नहीं होता कभी-कभी वो रणनीति का भी होता है।

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